सलाह(Advice) किससे लेनी चाहिए???

नमस्कार दोस्तों,
इस दुनियां में हज़ारों ,लाखोँ तरह के लोग रहते है।हर किसी के पास अपनी समझ और अपना सोच है।चाहे यह सोच किसी से प्रेरित होकर आती हो या या जीवन के अनुभव से,लेकिन दोनों ही हालातों में


सोच और समझ सही हो ऐसा जरूरी नही।हर इंसान का एक ही स्थिति में 
अलग तरह का अनुभव करता है,और उसके अनुसार उसकी सोच और समझ को एक नया आयाम मिलता है।
लेकिन एक वाक्य होता है जो लोग तभी कहते है जब उन्हें कोई समझ की बात कही जाए।अजीब है लेकिन बात बिल्कुल सही है।वो वाक्य है,
“हम कैसे मान लें?
या
इसका दूसरा रूप
मैं नही मानता।

यह वाक्य इंसान तभी कहता है जब कोई सही,सच्ची ,साफ बात बताई जाए,
किसी इंसान से किसी की बुराई की जाए ,तब वह नही कहेगा कि मैं नही मानता।
किसी को शराब के पीने के लिए कहा जाए
वो उस पर सवाल नही करता,
लोग एक दूसरे से लड़ रहे है,
तब कोई सवाल नही करता,कोई सबूत नही मांगता।
धूम्रपान, शराब,नशा करने के क्या नुकसान है यह सब सबूत के साथ मिल जाते है,लेकिन बहुत सारे लोग खुशी से ये सब चीज़े ले रहे है,और खुद को बीमार करने में शान समझते है।लेकिन इन्ही लोगो से,भक्ति,प्रभु,आध्यात्म की बात की जाए तो,यही कहेंगे, हम नही मानते,सबूत दिखाओ, प्रक्टिकल बात करो।
अरे भई, जिस चीज़ से नुकसान हो रहा है,जो गलत है,जब उसका सेवन करना शुरू किया तब तो सवाल उठाया नही,तब तो सबूत माँगा नही,लेकिन जब अच्छी बात कही जा रही है,सही राह दिखाई जा रही है,तब सवाल,सबूत माँग रहे हो,
इंसान उन बातों को नही मान रहा,जो सही है,लेकिन जो गलत है उसे एकदम अपना रहा है।फिर चाहे उससे खुद को ही नुकसान क्योँ ना हो।
ऐसी आदत को मूर्खता ही कहेंगे,और करने वाले को मूर्ख।

बात करते है एक ही स्थिति में लोग अलग अलग अनुभव कैसे करते है?

दो लोग साइकिल से जा रहे थे,एक
दोनी की साइकिल के टायर पंचर हो गए,
एक इंसान गुस्सा करने लगा,
साइकिल में पैर मारा और,चोट लग गयी।बाद में वो कहने लगा कि मेरी किस्मत खराब है।
वहीं ,दूसरा आदमी साइकिल से उतरा और और गाना गुनगुनाते हुए,आगे चलने लगा,आगे एक शादी होने वाली थी,वह वहाँ रुका,वहाँ के मालिक से मदद मांगी और उस मालिक ने ,उसे खाना खाने के लिए कहा और उसकी साइकिल ठीक करने के लिए फोन कर के,साइकिल ठीक करने वाले को बुला दिया।
तो इस तह एक परिस्थिति में दो लोगों का अनुभव अलग अलग रहा।
अगर पहला आदमी गुस्सा न करता आगे जाता तो कुछ और हो सकता था,लेकिन उसका अपना स्वभाव ने उसे इस तरह का अनुभव दिया।

मेरा ऐसा मानना है कि,
“सही सलाह इंसान का जीवन सही तरह से बदल देती है।”

यह बात बहुत ज्यादा जरूरी है कि आप सलाह किससे लेते है।
लोग गलत लोगो से सलाह लेते है और फिर जीवन को गलत बना लेते है,परेशानियों का सामना करते है।

गलत सलाह के उदाहरण:-
एक लड़का जो स्कूल में पास नही हुआ,उसने अपने दोस्त से सलाह ली कि मैं बहुत दुखी हूँ तो उसके दोस्त ने वो सलाह दी जो वो खुद करता है,उसने उसे शराब,सिगरेट की सलाह दी कि इससे टेंशन कम हो जाएगी।

 एक लड़की ने अपने रिश्ते के टूटने के बाद सलाह ली,तो उसे सभी रिश्तों से नफरत होने लगी,शादी न करने का फैसला ले लिया।

किसी के जीवन मे बहुत परेशानी थी,उसने किसी से सलाह नही ली क्योंकि उसे लगा उसकी परेशानी कोई समझेगा नही तो उसने खुदखुशी कर ली।

बात को मज़ाक में उड़ा देना या सही बात का मज़ाक उड़ान यह मूर्खों की पहचान है।

सोचो अगर आप सही जगह से सलाह ना ले तो क्या होगा।
एक इंसान को कैंसर हो जाये और डॉक्टर से सलाह लेने की वजह अपने जिगरी दोस्त से सलाह से जिसे कुछ पता न हो बीमारी के बारे में,और दोस्त भी ऐसा जो अपना अहँकार बढ़ाने के ले सलाह दे दे।तो क्या होगा।

दुनिया मे हर सलाह के लिए अलग लोग है जो इस काम के लिए मेहनत करते है।सबके अपने अलग फील्ड है।उनसे सलाह लेना जरूरी है।

Life and relationship से related सलाह के लिए life coach है।
बीमारियों के लिए डॉक्टर है।
अध्यात्म के लिए आध्यात्मिक लोग है।

लेकिन लोग इनसे सलाह नही लेंगे।
Life से related problem की सलाह अपने जिगरी से लेते है और अपनी ज़िंदगी तबाह करते है।
और कुछ इस बहम में रहते है कि उन्हें कोई समझ नही सकता,और वो अन्दर ही अंदर मरते रहते है।
आप कोई math या scince नही है जो आपको कोई समझ नही सकता,बस अपनी समस्या सही इंसान को सही तरीके के साथ बताए तो सब ठीक हो जाएगा।

तो जब भी सलाह लें उससे लें जो उससे related काम कर रहा हो,या उस फील्ड में मेहनत कर रहा हो।

कुछ ना कह कर ,घुट घुट कर मरने से अच्छा है,कि सही इंसान से सलाह लेकर अपना जीवन खुशियों  से भर लें।

और सबसे जरूरी बात कुछ भी बन बनना,लेकिन मूर्ख मत बनना,मतलब अपने हाथों अपनी ज़िंदगी तबाह मत करना।
धन्यवाद।

  -योगेन्द्र सिंह

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