समझदारी का पैमाना

इस संसार का हर इंसान खुद को समझदार मानता है इस बात में कोई शक नही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सच में सभी समझदार है? अगर हाँ। तो, फिर संसार की हालत इतनी बुरी कैसे है? संसार की हालत बुरी इसीलिए कही जा रही है क्योकि संसार में लड़ाई,नफरत और मतलब से रिश्ते बनाने वालों की कोई कमी नही है। संसार में बुराइयाँ बढ़ चुकी है। इस बात में कोई शक नही है लेकिन फिर भी कोई भी व्यक्ति इस बुराई के बढ़ने में अपना योगदान नही मानता।

जहाँ तक बात की जाये कि इस बुराई की जिम्मेदारी लेने कि तब हर व्यक्ति यह मानने से इंकार कर देगा कि उसकी वजह से दुनिया में बुराई है। लेकिन हाँ यह बात भी जरुर देखने को जरुर मिलेगी कि  वह इंसान किसी दूसरे को इस बुराई का जिम्मेदार मानेगा। 
पूरी दुनिया की बात अगर रहने भी दे,अगर किसी घर की बात भी करें कि किसी के घर में एक-दुसरें के बीच इतनी लडाई क्यों रहती है तब वह इसी बात की ओर इशारा करेंगे कि उनकी कोई गलती नही गलती दूसरे की है।
यहाँ पर यह कहने की कोशिश की जा रही है कि हर व्यक्ति खुद को समझदार मानता है और वह मानता है कि वह कोई ऐसा काम नही करता जो गलत हो। लेकिन दूसरों को km समझदार मानने के कारन वह ऐसा मानता है कि दूसरे लोग जरूर ऐसा कर सकते है जो गलत हो।

इंसान खुद को समझदार और दूसरे को मुर्ख मान कर बैठा हुआ है। शयद इसी कारन संसार की ऐसी हालत है। 
सच में एक समझदार इंसान वही होता है जो हर कदम पर खुद को देखता है कि उसकी गलती की वजह से ऐसा हुआ है। एक समझदार इंसान दूसरों में कमियां देखने की जगह खुद में कमी देखता है और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करता है। और यही आदत उसे एक दिन महान बना देती है। समझदारी का पैमाना यही है कि हम खुद पर कितना काम करते है। दूसरों की गलती देखने की वजाय इंसान खुद में सुधर करता है। और यही चीज़ इंसान को महान बनती है और यह म्हणता का गुण उसे नम्र बनता है। शायद सभी महान लोगों ने ऐसा ही किया है इसीलिए वे सभी महान और समझदार है।
धन्यवाद।
-योगेन्द्र सिंह
sirfyogi.com

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