बात का मर्म।

हज़ारों बातों को इंटरनेट से उठा कर ज्ञान देना अलग बात है और खुद के ज्ञान की गहराई से कही गयी एक बात भी आपको सुकून और दूसरे के जीवन में सुधार ला सकती है।
इसीलिए खुद को महान दिखाने के चक्कर में कभी रटन ना करें बल्कि ईश्वर से ज्ञान अर्जित कर के एक बात भी अगर अनुभव से कहोगे तो हजारों का जीवन सुधार पाओगे।

इसीलिए हज़ारों बातों को रटने से बेहतर है एक बात को समझना और उसका मर्म जानना। इससे आपका ज्ञान भी गहरा होगा और  दूसरों को भी यह ज्ञात होगा कि ज्ञान आपके भीतर से निकला है, ना कि बाहर से उठाया हुआ ज्ञान है।

आत्म ज्ञान कि शुरुआत बात का मर्म जानने से होती है ना कि उधार के लिए ज्ञान से। किसी बात का मर्म जानने के लिए उससे जुड़ना जरूरी है जो ज्ञान का स्त्रोत है। और ज्ञान का स्त्रोत स्वयं ईश्वर है। इसीलिए ईश्वर से जुड़ाव ही आपके भीतर ज्ञान का दीपक जला सकता है। इसके अलावा उधार का ज्ञान सिर्फ भीतर अंधकार ही पैदा कर सकता है। ज्ञान की रोशनी नही। इसीलिए बात नही ,बात का मर्म समझिए।

             -योगेन्द्र सिंह

© Yogendra Singh | 2020
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