क्या आप मंथरा है?

यह सवाल बहुत अलग है। शायद कुछ लोगों को पसंद ना आये। लेकिन आज के दौर में इंसान में प्रभु श्री राम की तरह भावनाएं हो या ना हो लेकिन मंथरा की तरह भावनाएं अक्सर लोगों में देखने को मिल जाती है। उन भावनाओं का इंसान में होना उसे मंथरा बना देता है। मंथरा होने का पुरुष या स्त्री से नही है बल्कि यह तो इंसान के अंदर चल रही भावनाओं पर निर्भर करता है।
अगर आप में किसी से ईर्ष्या या जलन की भावना है तो आप मंथरा है। अगर आप चुगली करने में माहिर है औए लोगों के बीच दूरियां पैदा करते है तो आप मंथरा है।
इसके साथ अगर आप अपनी बनाई नीतियों के द्वारा दूसरे को हानि पहंचा कर खुद लाभ लेते है तो भी आप मंथरा है।
तो क्या आप मंथरा है? ज़रा गहराई से सोचिये कहीं दुनियाँ को बुरा कहते-2 खुद तो बुराई के देवता तो नही बन गए।

चलिए एक और पहचान देते है। अगर आप अपनी मीठी बातों से लोगों से काम निकलवाने के बाद उनसे रिश्ता खत्म कर देते है यानी मतलब के लिए लोगों से मीठी बातें करते है और काम हो जाने के बाद उन्हें जानते भी नही तो भी आप मंथरा है।

यह मंथरा का किरदार अब व्यापक रूप ले चुका है। रामायण वाली मंथरा में शायद इतनी खूबियां ना हो लेकिन आज के समय  में मंथरा में बहुत खूबियां है।
तो इन सभी बातों को खुद के भीतर झांकिए और बताएं कि
क्या आप मंथरा है?

यह सवाल बहुत कड़वा है। शायद आप खुद से ही झूठ कहे।
लेकिन झूठ कहने से आपके भीतर की मंथरा खत्म नही होने वाली।

कैसा लगता है जब कोई आपसे ज्यादा तरक्की कर ले?
कैसा लगता है तब, जब दो लोगों के रिश्ते बहुत अच्छे चल रहे हो खासकर की उस स्थिती में जब आप उस सख्स से रिश्ते बनाने चाह रहे हो?

किसी से ईर्ष्या करना,किसी का इस्तेमाल करना,किसी के बीच आग लगाना, किसी के साथ छल करना। यह सभी खूबियां है आज की मंथरा की। हो सकता है कुछ ज्यादा भी हो। अगर आपको कुछ और खूबियाँ पता है तो कमेंट में लिखिए।
इस लेख को शेयर कीजिये और लोगों से पूछिए कि
क्या आप मंथरा है?
लेकिन उससे पहले खुद से पूछिए।
सच आपको खुद पता चल जाएगा। ये बात अलग है कि आप बाहर से श्री राम बनकर दिखाते हो लेकिन भीतर से आप मंथरा है या श्री राम यह आप बेहतर जानते है।

तो बताइए, क्या आप मंथरा है?

  – योगेन्द्र सिंह


 . © Yogendra Singh | 2020
sirfyogi.com

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