किस्सा पेन का।।

                                 

मैं एक बार एक सरकारी दफ्तर गया था।वहां मुझे सरकारी कागज पर सिर्फ एक हस्ताक्षर करने थे,समस्या बस इतनी थी कि मेरा पेन काम नही कर रहा ।नया पेन लेने में कोई बड़ी बात नही थी,लेकिन दुकान उस दफ्तर से इतनी दूर थी कि जब तक वापस आ पाता,दफ्तर बन्द हो जाता।

 इसीलिए


मैंने सोचा कि एक पेन की ही तो बात है कि कोई भी पेन दे देगा इतनी बड़ी बात भी नही है।तो जिस खिड़की पर हस्ताक्षर करने के लिए सरकारी कागज जमा करना था मैने उन्ही से पेन मांग लिया ।लेकिन उन्होंने अलग अंदाज में मन कर दिया कि पेन सरकारी सम्पत्ति है,माफ कीजिये हम आपको नही दे सकते।मुझे लगा कि चलो बात भी उनकी ठीक है।फिर मैंने थोड़ी दूर मेज़ के पास खड़े इंसान से पेन मांगने के लिए अनुरोध किया,उस इंसान ने बहुत क्रोध और परेशानी वाली नज़रों से मुझे देखा और कहा कि मेरे अब तक पांच पेन खो चुके है।और अब मैने समाज सेवा बन्द कर दी है।मैंने भी मन में सोच बात तो इनकी बहुत सत्य प्रतीत हो रही है।लेकिन आवश्यकता है एक पेन की जिससे यह हस्ताक्षर कर सकूँ।

मैंने दरवाजे के बाहर कुर्सी पर बैठे एक बुजुर्ग से पेन मांगने की हिम्मत की,डरते डरते मैंने उनसे विनती की,मोहदय,कृपया एक पेन की आवश्यकता है,क्या आप मुझे एक पेन कुछ क्षणों के लिए प्रदान कर सकते है।उन्होंने पहले तो मेरी ओर देखा और ऊपर से नीचे तक निरीक्षण करने के पश्चात बोले,दिखने में तो पड़े लिखे लग रहे हो,इतना भी ज्ञात नही कि एक दफ्तर में आने से पहले एक पेन अपने पास रख लेते।मेरे पास उनकी बातों का जवाब तो था लेकिन जवाब देने का समय नही था।आखिर में मैंने दफ्तर के बड़े अधिकारी को अपनी समस्या सुनाई,अधिकारी मोहदय ने मुझसे पूछा ,कौन से सरकारी कागज पर आपके हस्ताक्षर की जरूरत है?

मैंने अधिकारी मोहदय की तरफ अपना सरकारी कागज बढ़ाया।उन्होंने सरकारी कागज को ध्यान से देखा और फिर दो बार मेरी तरफ देखा और कहा,कि अभी नए नियम लागू होने का संदेश मिला है,आप जिस सरकारी कागज पर हस्ताक्षर करने के लिए घूम रहे है यह अब वैध नही है।कल से यह कार्य इंटरनेट से हुआ करेंगें।एभी दफ्तर भी बंद होने वाला है,आप कल इसे इंटरनेट से जमा कर सकते है।और हंसते हुए यह भी कह दिया वहाँ किसी पेन की आवश्यकता भी नही पड़ेगी।

मैं उस दिन वापस आ गया और अगले दिन सरकारी काम को इंटरनेट से कर  दिया लेकिन एक बात बहुत याद रही की पेन कितनी जरूरी चीज है।साथ ही यह भी जाना कि एक तरफ जहाँ एक दूसरे के लिए सब कुछ करने के लिए तैयार है,दूसरों की मदद करने को तैयार है वहीं लोग एक पेन देने में भी हिचकिचाहट जाहिर करते है।जहां एक ओर आधुनिक युग आ रहा है,वहीं लोग भावुकता को छोड़ कर प्रक्टिकल जीवन को जीने का प्रयास कर रहे है।परंतु मनुष्य जीवन भावनाओं से ही बना है और अच्छी ,सकारात्मक भावनाएं ही जीवन को महकती है।

                                                            -योगेन्द्र सिंह(writer)

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