इग्नोर या बॉयकॉट करना सही या गलत? 

बॉयकॉट करना यानी किसी इंसान से दूरी बना लेना, ऐसा करना की किसी एक इंसान से सभी लोगों का दूरी बना लेना। आजकल यह करना प्रचलन में है। जैसे पहले से के समय में अछूत लोगों के साथ लोग किया करते थे।, अब यही काम पड़े लिखे लोग ऐसा कर रहे है जो जात पात को खत्म करना चाहते है।  
किसी के साथ ऐसा व्यवहार करना जैसे कि वो नीच है, अछूत और सभी उससे दूरी बना ले। कभी सोचा है कि ऐसा करने से उस इंसान के मन पर क्या प्रभाव पड़ता होगा? 
वो खुद को नीचा समझने लग पड़ता है। उसमें आत्मविश्वास की कमी होने लगती है। यहाँ तक की उसमें आत्महत्या के ख्याल भी आने लगते है। 
यह कितना इंसानियत के हिसाब से सही है? 
बॉयकॉट करना भी इसी श्रेणी में आता है। 
किसी को बॉयकॉट करके या इग्नोर करके इंसान उस क्या जाताना चाहता है। 
यह दोनों कार्य इंसान तभी करता है जब कोई इंसान उससे ज्यादा काबिल हो। 
इंसान नही चाहता कि उसकी अहमियत कम हो इसीलिए वह ऐसे इंसान को बॉयकॉट करने को कहता है जो उससे ज्यादा काबिल हो। क्योंकि वह समझता है कि उसकी अहमियत कम हो जायेगी। 
लेकिन यह बात सोचने वाली है कि फूल को खिलने से कौन रोक सकता है? 
सूरज को उगने से कौन रोक सकता है?

इसीलिए किसी को बॉयकॉट करने से पहले हजार बार सोचे। आपके द्वारा किया गया यह कार्य किसी का अस्तित्व खत्म कर सकता ही, किसी के आत्मविश्वास को खत्म कर सकता है, किसी को आत्महत्या करने पर मजबूर कर सकता है। 
ध्यान दीजिये।

– योगेन्द्र सिंह
sirfyogi.com

©Yogendra Singh | 2019

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