अहंकार और घमंड।

अहंकार और घमंड, ये ऐसे शब्द है जिनके बारें में दुनिया में हमेशा से बताया गया है कि री इंसान के लिए नुकसान का कारण बनते है। हम चाहे बात करें किताबों में दर्ज कहानियों


की या फिर सच में हुई घटनाओं की, हर जगह यही दिखाया गया या ये कहे की हर जगह से यही सीख मिली कि ये दोनों शब्दों के कारण ही इंसान ने खुद के जीवन में दुख को बुलवा दिया। 
सवाल ये उठा खड़ा होता है कि क्या घमंड और अहंकार दो अलग चीजें है या फिर एक ही चीज है? 
देखने में और सुनने में शायद ऐसा लगे कि दोनो शब्द के एक ही अर्थ है। लेकिन मुझे ऐसा प्रतीत है होता है कि इन शब्दों के अर्थ अलग अलग है।ये शब्द के अर्थ अलग क्यों है? 
घमंड अहंकार का विकराल रूप है।  
जो बहुत ही आसानी से सभी की नजर में आ जाता है।  ऐसी सम्भावना की जा सकती है कि घमंड उस इंसान को नजर आ सकता है जो घमंडी है।

अब आप यह सोच रहे होंगे कि चलों घमण्ड तो समझ आ गया। लेकिन  अहंकार भी तो ऐसा ही होता है, वो भी तो, को नजर आता है। 
तब मेरा जवाब होगा कि नही। ऐसा नही है। 
अहंकार ऐसा भी हो सकता है की दूसरों को नजर आ जाए।  लेकिन साथ ही वह ऐसा भी हो सकता है कि वह खुद को नजर ना आये और दूसरों को भी नजर ना आये। 
एक घमण्डी इंसान की पहचान की जा सकती है लेकिन एक ऐसा इंसान जिसमें अहंकार हो।  
ऐसे इंसान की पहचान नही की जा सकती। 
अहंकार बहुत ही सूक्ष्म होता है और घमंड सूक्ष्म नही होता। 
यही फर्क है घमंड और अहंकार में। 
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धन्यवाद।© योगेन्द्र सिंह | 2019

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